Technology

Digital Signature क्या है? कैसे काम करता है?

digital signature kya hai aur digital signature kaise kaam karta hai

इंटरनेट का उपयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और ऐसे में हमारे बहुत सारे काम क्लाउड बेस्ड यानी कि इंटरनेट के आधारित हो रहे हैं।

हर रोज हम बहुत सारे ऐसे काम इंटरनेट के माध्यम से करते हैं जिसमें हम कॉन्फिडेंशियल डाटा को एक जगह से दूसरी जगह पर इंटरनेट के माध्यम से भेजते हैं हर रोज कई सारे लोग क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल इंटरनेट की वेबसाइट पर करते हैं।
कई सारी पेमेंट एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके अमाउंट को ट्रांसफर किया जाता है। टेक्नोलॉजी ने हमारे जीवन को बहुत ही सरल बनाया है लेकिन इसमें बहुत सारे ड्रॉबैक भी शामिल है।

आपके भेजे हुए संदेश को बीच में ही दूसरे किसी व्यक्ति के द्वारा बदल दिया जाता है।

ऐसे में यह प्रमाणित करना मुश्किल है कि आपके पास आया हुआ संदेश या डॉक्यूमेंट आपकी पहचान वाले व्यक्ति ने ही भेजा है या उसे किसी ने बीच में ही बदल दिया है।

ऐसी परिस्थिति में इंटरनेट की सिक्योरिटी पर सवाल खड़े होते हैं।

अनुक्रमणिका छिपाए



Digital Signature की आवश्यकता क्यों पड़ी?

जब इंटरनेट के माध्यम से डाटा एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रांसफर किया जाता है तब उसकी सिक्योरिटी ऐसी होनी चाहिए कि सामने वाले व्यक्ति को पता चले कि मुझे मिला हुआ डॉक्यूमेंट सही है और इसलिए डिजिटल सिगनेचर का अविष्कार किया गया। डिजिटल सिग्नेचर आपके डॉक्यूमेंट की गेरेंटी लेता है और सिक्योरिटी देता है Digital Signature क्या है? कैसे काम करता है? यह आप इस आर्टिकल से पढ़ सकते हो।

डिजिटल सिग्नेचर क्या है? (What is Digital Signature in Hindi)

डिजिटल सिगनेचर एक ऐसी टेक्निक है जिससे यह साबित होता है की सामने वाले व्यक्ति ने भेजा हुआ मैसेज या डॉक्यूमेंट सही है।

जिस तरह हम किसी भी डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर करते हैं या स्टैम्प लगाते हैं उसी तरह डिजिटल डॉक्यूमेंट पर डिजिटल सिग्नेचर इंसर्ट करके सामने वाले व्यक्ति को हम मैसेज या डॉक्यूमेंट भेजते हैं। इससे यह साबित होता है कि हमने भेजा हुआ डॉक्यूमेंट ओरिजिनल है और उसमें किसी ने भी बीच में कोई भी छेड़छाड़ की हुई नहीं है।

सरल भाषा में कहें तो इंटरनेट के माध्यम से कोई भी डॉक्यूमेंट जब हम भेजते हैं तो भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करवाने की टेक्निक को डिजिटल सिगनेचर की प्रक्रिया कहां जाता है।

History of Digital Signature in Hindi

वर्ष 1976 में व्हाइटफील्ड डीफी और मार्टिन हेलमेन ने पहली बार डिजिटल सिग्नेचर का जिक्र किया था।
वह एक प्राथमिक लेवल का डिजिटल सिगनेचर था।

उसके बाद रोनाल्ड राइवेस्ट, आदि समीर और लैन एदलमेन यह तीनों ने मिलकर RSA अलगोरिधम का आविष्कार किया।
इस एल्गोरिदम का उपयोग डिजिटल सिग्नेचर को प्रोड्यूस करने के लिए होता था।

Digital Signature कैसे काम करता है? Step by Step in Hindi

how digital signature works in hindi
process of digital signature

ऊपर दी गई इमेज में दो दोस्त है एक है राहुल और दूसरी है सिमरन। राहुल अपनी दोस्त को एक डॉक्यूमेंट भेजता है जिसमे मैसेज लिखा है की “आज गार्डन में मिलेंगे” सोचो आपके पास एक डिजिटल सिग्नेचर है और आपको एक डॉक्यूमेंट अपने दोस्त राहुल को भेजना है तो आप क्या करोगे?

स्टेप 1 : डॉक्यूमेंट रेडी करना

आपको कोई डॉक्यूमेंट किसी को भेजना है तो आपको अपना डॉक्यूमेंट pdf में कन्वर्ट करके रेडी रखना होगा।

स्टेप 2 : USB टोकन को कंप्यूटर में डालना

Certifying Authority (CAs) के द्वारा दिया गया हुआ यूएसबी टोकन आपके कंप्यूटर में इंसर्ट करना आवश्यक है।

क्योंकि इसमें आपकी प्राइवेट की स्टोर की हुई होती है।

यूएसबी टोकन मैं एक छोटा सा सॉफ्टवेयर होता है।

जिसे आप को ओपन करके उसमें ID और Password डालना होता है।

जिससे पता चले कि यह आपकी ही डिजिटल सिगनेचर यूएसबी टोकन है।

स्टेप 3 : डॉक्यूमेंट में डिजिटल सिग्नेचर इन्सर्ट करना

सॉफ्टवेयर में आईडी पासवर्ड डालने के बाद आपको अपने पीडीएफ डॉक्युमेंट में जाना है।

जहां पर आपको पिले रंग का एक बॉक्स आपके माउस करसर के साथ घूमता नजर आएगा।

ये यह बताता है कि आपको डिजिटल सिग्नेचर कहां पर रखनी है?

आपको जहां पर भी अपना डिजिटल सिग्नेचर रखना है वहां पर क्लिक करना होता है।

जैसे ही आप क्लिक करते हो आपका डिजिटल सिग्नेचर वहां पर आ जाता है।

यह प्रोसेस होते ही आपकी फाइल सिक्योर हो जाती है।

स्टेप 4 : डॉक्यूमेंट को private key से encrypt करना

प्राइवेट की का उपयोग करके डॉक्यूमेंट को encrypt यानी कि lock किया जाता है। डॉक्यूमेंट भेजने वाले की private key का उपयोग करके डॉक्यूमेंट में एक hash वैल्यू generate की जाती है।

स्टेप 5: डॉक्यूमेंट इंटरनेट के माध्यम से भेजना

इंटरनेट का उपयोग करके डॉक्यूमेंट को भेजा जाता है।

डॉक्यूमेंट में डिजिटल सिगनेचर होती है यानी कि वह डॉक्यूमेंट एंक्रिप्ट किया हुआ होता है जिसमें Hash वैल्यू जुड़ी हुई होती है। उदाहरण के तौर पर अगर Hash वैल्यू को देखें तो a1d0+g00g1h1s+10j10 इस तरह का कोड डॉक्यूमेंट के साथ जनरेट हुआ होता है।

स्टेप 6 : डिजिटल सिग्नेचर वेरिफिकेशन

जब यह डॉक्यूमेंट सिमरन के पास आता है तो वह उसे खोलने का प्रयास करती है। डॉक्यूमेंट भेजने वाले राहुल की Public Key का उपयोग करके दूसरा एक कोड जनरेट होता है। डॉक्यूमेंट भेजने वाले का HASH CODE और डॉक्यूमेंट पाने वाले का HASH CODE दोनों को एक दूसरे के साथ तुलना की जाती है। अगर दोनों HASH CODE एक समान होते हैं तो यह साबित होता है कि डॉक्यूमेंट को किसी ने भी चेंज किया हुआ नहीं है। दोनों HASH CODE समान पाए जाने पर ही डॉक्यूमेंट को डिक्रिप्ट यानी कि अनलॉक किया जाता है। वरना यह डॉक्यूमेंट आप पढ़ नहीं सकते।

Digital Certificate क्या है? (What is Digital certificate in hindi)

डिजिटल सर्टिफिकेट थर्ड पार्टी की ओर से दिया जाता है। यह सर्टिफिकेट डाटा भेजने वाले व्यक्ति की पहचान को साबित करता है।

सर्टिफिकेट अथॉरिटी के द्वारा डिजिटल सर्टिफिकेट दिया जाता है।

जिस तरह हम व्यक्ति की पहचान के लिए अलग अलग ID card जैसे की आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। वैसे ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डिजिटल सर्टिफिकेट के जरिए व्यक्ति की पहचान होती है।

सर्टिफिकेट में सर्टिफिकेट पाने वाले व्यक्ति की पूरी इंफॉर्मेशन स्टोर होती है।

Digital Certificate और Digital Signature में क्या अंतर है ?

डिजिटल सर्टिफिकेट और डिजिटल सिग्नेचर में बहुत बड़ा अंतर है।

डिजिटल सिगनेचर से यह पता चलता है कि जो डॉक्यूमेंट भेजा गया है वह सही व्यक्ति ने भेजा है और उसमें किसी भी दूसरे व्यक्ति ने बीच में कोई भी बदलाव किया नहीं है।

Digital certificate व्यक्ति की पहचान को दर्शाता है चाहे वह डॉक्यूमेंट या मैसेज भेजने वाला हो या पाने वाला।

दोनों का इस्तेमाल सिक्योरिटी के लिए होता है।

Digital Signature कहा से प्राप्त करे?

भारत मे कुछ निम्न (CA) Digital signature देने वाली एजेंसी है जो निचे दी गई है।

CDAC, Safe Scrypt, n code Capricorn इत्यादि हैं जिन्हें भारत सरकार ने Certificate Authority के रूप में लाइसेंस दिया हुआ है।

  • E-mudhra
  • Docsketch
  • Eversign
  • Adobe Sign
  • signNow
  • SignRequest
  • Digital Signature
  • IDRBT
  • Myeign
  • eSign PDF
  • CDAC
  • NIC


Digital Certificate का इस्तेमाल कहाँ होता है।

इनकम टेक्स रिटर्न फाइल करने में।

१) GST रिटर्न फाइल करने में।

२) टेंडर भरने के लिए।

३) TDS रिटर्न फाइल करने के लिए।

४) EPF रिटर्न फाइल करने में।

५) सरकारी दफ़्तरोंमे

Digital Signature के फायदे और नुकशान क्या है?

कोई भी टेक्नोलॉजी हो उसके फायदे और नुकशान होते ही है तो चलो देखते है डिजिटल सिग्नेचर के क्या फायदे और नुकशान है।

डिजिटल सिग्नेचर के फायदे

१) डाटा ट्रांसेक्शनमे डिजिटल सिग्नेचर एक बहेतरीन सुरक्षा प्रदान करता है। authorized person के बिना दूसरा कोई आपके डाक्यूमेंट्स को देख नहीं सकता।

२) जिस डाक्यूमेंट्स के ऊपर डिजिटल सिग्नेचर की हुई होती है उस डाक्यूमेंट्स के स्टेटस को आप सरलता से ट्रैक कर सकते हो।

३) डॉक्यूमेंट बहुत ही फ़ास्ट तरीके से डिलीवर हो जाता है।

४) यह १००% लीगल प्रक्रिया है क्योंकि यह सरकारी अथॉरिटी के द्वारा दिया जाता है।

५) अगर आपने डिजिटल सिग्नेचर किया है तो आप इसको नकार नहीं सकते की यह आपने नहीं किया है।

६) जब आप डिजिटल सिग्नेचर करते हो तो तारीख और समय अपने आप जुड़ जाते है।

७) डिजिटल सिग्नेचर डॉक्यूमेंट को बिच में दूसरा कोई बदल नहीं सकता।

८) सिग्नेचर करनेवाले की पूरी इनफार्मेशन साथ में जुडी हुई होती है।

डिजिटल सिग्नेचर के नुकशान

१) डिजिटल सिग्नेचर सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के ट्रबलशूटिंग में बहुत सारा समय चला जाता है।

२) कोम्प्लेक्सिटी की वजह से कभी-कभी ऐसा लगने लगता है कि इसका इस्तेमाल ना करें तो ही अच्छा है। इतने लेवल तक का फर्स्ट्रेशन होता है।

३) डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करने में सॉफ्टवेयर ही सबसे बड़ी तकलीफ का काम होता है।

४) सॉफ्टवेयर सेटअप सरलता से नहीं होता है।

५) सेट अप करने के लिए एक्सपर्ट के बिना आप काम नहीं कर सकते।

६) डिजिटल सिग्नेचर ट्रांजैक्शन करने के लिए डॉक्यूमेंट भेजने वाले और डॉक्यूमेंट पाने वाले दोनों के लिए डिजिटल सिग्नेचर खरीदना पड़ता है।

७) डिजिटल सर्टिफिकेट के साथ काम करने के लिए आपको वेरिफिकेशन सॉफ्टवेयर को भी खरीदना पड़ता है।

Digital Signature के प्रकार कौनसे है?

तीन तरह के डिजिटल सिगनेचर सर्टिफिकेट है। Class I, Class II, और Class III.

यह डिजिटल सिगनेचर सर्टिफिकेट अलग-अलग उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होते है।

Class I Certificate

Class I सर्टिफिकेट व्यक्तिगत या निजी ग्राहक को दिया जाता है।

यह सर्टिफिकेट सुनिश्चित करता है कि सब्सक्राइब ने जो जानकारी दी हुई है वह जानकारी और कंजूमर के डेटाबेस में जो जानकारी है वह एक दूसरे के विरोधाभास में ना हो।

Class II Certificate

Class II Certificate व्यापारी व्यक्ति को या निजी सब्सक्राइब को दिया जाता है
यह सर्टिफिकेट सुनिश्चित करता है कि सब्सक्राइब ने दी हुई जानकारी और कंजूमर डेटाबेस में जानकारी है वह एक दूसरे के विरोधाभास में ना हो।


Class III Certificate

Class III Certificate व्यक्तिगत या संस्था को दिया जाता है।
यह सर्टिफिकेट उच्च लेवल की सुरक्षा प्रदान करता है और इसीलिए इसको ई-कॉमर्स एप्लीकेशन में इस्तेमाल किया जाता है।

सुझाव (Suggestion)

यह आर्टिकल आपको कैसा लगा? आपका सुझाव अवश्य दे।

टेक्नोलॉजी के बारे में और कोई जानकारी के बारे में आप जानना चाहते हो तो आप कमेंट बॉक्स में लिखकर बता सकते हो।

धन्यवाद!!!